तुझको हज़ार शर्म सही मुझ को लाख ज़ब्त

तुझको हज़ार शर्म सही मुझ को लाख ज़ब्त

तुझको हज़ार शर्म सही मुझ को लाख ज़ब्त,
मोहब्बत वो राज़ है कि छुपाया न जाएगा।
~ Altaf Hussain Hali


Tujhko Hazar Sharm Sahi Mujh Ko Laakh Zabt,
Mohabbtat Wo Raaz Hai Ki Chhupaaya Na Jayega.