जाते वक्त वो हाथ तक मिलाकर न गई Rajnish / Aug 11, 2026 जाते वक्त वो हाथ तक मिलाकर न गई जाते वक्त वो हाथ तक मिलाकर न गई, मैंने चाहा था जिसे सीने से लगाकर रोना। Jaate vakt vo haath tak milaakar na gaee, Mainne chaaha tha jise seene se lagaakar rona. Shayari 2 Line Shayari Chaah Shayari Haath Shayari Waqt Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026