ज़ब्त ए सैलाब ए मुहब्बत को कहाँ तक रोके

ज़ब्त ए सैलाब ए मुहब्बत को कहाँ तक रोके

ज़ब्त ए सैलाब ए मुहब्बत को कहाँ तक रोके

ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोके
दिल में जो बात हो आखों से बयाँ होती है !!


jabt-e-sailaab-e-muhabbat ko kahan tak roke
Dil mein jo baat ho aankhon se bayaan hoti hai