जरा सा हट के चलता हूँ ज़माने की रिवायत से

जरा सा हट के चलता हूँ ज़माने की रिवायत से

जरा सा हट के चलता हूँ ज़माने की रिवायत से,
कि जिन पे बोझ डाला हो, वो कंधे याद रखता हूँ।


Jara Sa Hat Ke Chalta Hoon Zamane Ki Riwayat Se,
Ke Jinpe Bojh Dala Ho Woh Kandhe Yaad Rakhta Hoon.