जमाने को बदलता देखकर खुद को ना बदल पाया मैं

जमाने को बदलता देखकर खुद को ना बदल पाया मैं

जमाने को बदलता देखकर खुद को ना बदल पाया मैं

जमाने को बदलता देखकर, खुद को ना बदल पाया मैं,
बस राहों में ही गुजर हुई जिंदगी, कभी मंजिल तक ना पहुँच पाया मैं !!


Zamane ko badalata dekhakar,
Khud ko na badal paaya main !!
Bas raahon mein hee gujar huee jindagee,
Kabhi manjil tak na pahunch paaya main !!