गुजर जाती है रात इसी कशमकश में

गुजर जाती है रात इसी कशमकश में

गुजर जाती है रात इसी कशमकश में,
कि कम्बल में हवा किधर से घुस रही है।


Gujar Jati Hai Raat Isee Kashmkash Mein,
Ki Kambal Mein Hawaa Kidhar Se Ghus Rahi Hai.