कही बैठी वो मेरा जिक्र कर मुस्कुरा रही होगी

कही बैठी वो मेरा जिक्र कर मुस्कुरा रही होगी

कही बैठी वो मेरा जिक्र कर मुस्कुरा रही होगी

कही बैठी वो मेरा जिक्र कर मुस्कुरा रही होगी...
ये हिचकी शाम से यूँ ही तो नही आ रही होगी..


Kahee baithee vo mera jikr kar muskura rahee hogee...
Ye hichakee shaam se yoon hee to nahee aa rahee hogee..