कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब Admin / Aug 11, 2026 कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब, आज तुम याद आये तो बेहिसाब आये। Kar Raha Tha Gham-E-Jahan Ka Hisaab, Aaj Tum Yaad Aaye Toh Be-Hisaab Aaye. Shayari Yaad Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026