ऐ अजल तुझसे यह कैसी नादानी हुई

ऐ अजल तुझसे यह कैसी नादानी हुई

ऐ अजल तुझसे यह कैसी नादानी हुई,
फूल वो तोड़ा चमन भर में वीरानी हुई।


Ai Azal Tujhse Yeh Kaisi Nadaani Hui,
Phool Woh Toda Chaman Bhar Mein Veerani Hui.