उस पर ही भेजता है वो आफ़त भी मौत भी,

उस पर ही भेजता है वो आफ़त भी मौत भी,

उस पर ही भेजता है वो आफ़त भी मौत भी,
शायद उसे ग़रीब का बच्चा है ना-पसंद

इम्दाद आकाश।।


Us par hee bhejata hai vo aafat bhee maut bhee,
Shaayad use gareeb ka bachcha hai na-pasand

Imdaad aakaash..