इन्कार जैसी लज्जत इक़रार में कहाँ Admin / Aug 11, 2026 इन्कार जैसी लज्जत इक़रार में कहाँ इन्कार जैसी लज्जत इक़रार में कहाँ, बढ़ता रहा इश्क ग़ालिब उसकी नहीं-नहीं से। Inkaar Jaisi Lazzat Ikraar Mein Kahan, Barhta Raha Ishq Ghalib Uski Nahi-Nahi Se. Shayari Love Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026