इक बार खफा हुवा तो फिर मेहरबान न हुवा

इक बार खफा हुवा तो फिर मेहरबान न हुवा

इक बार खफा हुवा तो फिर मेहरबान न हुवा
मिजाज किसी का अपने मुकद्दर जैंसा हो गया है


Ik baar khapha huva to phir meharabaan na huva
Mijaaj kisee ka apane mukaddar jainsa ho gaya hai