अब तो बेगैरतें इस कदर बढ़ गयीं हैं फ़राज़

अब तो बेगैरतें इस कदर बढ़ गयीं हैं फ़राज़

अब तो बेगैरतें इस कदर बढ़ गयीं हैं फ़राज़,
शेर किसी और का होता है नाम मेरा ठोंक देते हैं।


Ab Toh Be-Ghairtein Iss Kadar Barh Gayi Hain Faraz,
Sher Kisi Aur Ka Hota Hai Naam Mera Thhok Dete Hain.