सिर के ऊपर एक चादर पतली होती जा रही है, खामोशी से, बिना शोर के, हर रोज़ घिसती जा रही है। Admin / Sep 24, 2026 सिर के ऊपर एक चादर पतली होती जा रही है, खामोशी से, बिना शोर के, हर रोज़ घिसती जा रही है। सिर के ऊपर एक चादर पतली होती जा रही है, खामोशी से, बिना शोर के, हर रोज़ घिसती जा रही है। Sar ke upar ek chadar patli hoti ja rahi hai, khamoshi se, bina shor ke, har roz ghisti ja rahi hai. Shayari World Ozone Day Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026