सब यहाँ इतने यकीन से खड़े हैं Admin / Sep 24, 2026 सब यहाँ इतने यकीन से खड़े हैं सब यहाँ इतने यकीन से खड़े हैं, मैं ही अकेला डरा-डरा सा हूँ, पर शायद हर चेहरे के पीछे मेरे जैसा ही एक डर छुपा है। Sab yahan itne yakeen se khade hain, main hi akela dara-dara sa hoon, par shayad har chehre ke peeche mere jaisa hi ek darr chhupa hai. Shayari Imposter Syndrome Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026