प्यास लगे तो पानी की कदर समझ आती है, वरना बहता नल भी रोज़ नज़रअंदाज़ हो जाती है। Admin / Sep 24, 2026 प्यास लगे तो पानी की कदर समझ आती है, वरना बहता नल भी रोज़ नज़रअंदाज़ हो जाती है। प्यास लगे तो पानी की कदर समझ आती है, वरना बहता नल भी रोज़ नज़रअंदाज़ हो जाती है। Pyaas lage to pani ki kadar samajh aati hai, varna behta nal bhi roz nazarandaz ho jati hai. Shayari World Water Day Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026