जो सबक बचपन में सीखा, वो हमेशा सच नहीं होता, अब नए सिरे से सीख रही हूँ, प्यार को बिना डर के जीना। Admin / Sep 24, 2026 जो सबक बचपन में सीखा, वो हमेशा सच नहीं होता, अब नए सिरे से सीख रही हूँ, प्यार को बिना डर के जीना। जो सबक बचपन में सीखा, वो हमेशा सच नहीं होता, अब नए सिरे से सीख रही हूँ, प्यार को बिना डर के जीना। Jo sabak bachpan mein seekha, wo hamesha sach nahi hota, ab naye sire se seekh rahi hoon, pyaar ko bina dar ke jeena. Shayari Attachment Style Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026