मन को यहीं रोक लो, दोस्त Admin / Sep 24, 2026 मन को यहीं रोक लो, दोस्त मन को यहीं रोक लो, दोस्त, कहीं और कुछ नहीं है सच, जो चाय हाथ में ठंडी हो रही है बस वही पल है अभी तक। Man ko yahin rok lo, dost, kahin aur kuch nahi hai sach, jo chai haath mein thandi ho rahi hai bas wahi pal hai abhi tak. Shayari Mindfulness Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026