मशीन की आवाज़ में, घर की पुकार छुपी है, सुरक्षा एक वादा है, जो शाम को सलामत ले आए। Admin / Sep 24, 2026 मशीन की आवाज़ में, घर की पुकार छुपी है, सुरक्षा एक वादा है, जो शाम को सलामत ले आए। मशीन की आवाज़ में, घर की पुकार छुपी है, सुरक्षा एक वादा है, जो शाम को सलामत ले आए। Machine ki aawaz mein, ghar ki pukar chhupi hai, Suraksha ek vaada hai, jo shaam ko salamat le aaye. Shayari National Safety Day Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026