कुल्हाड़ी को सिर्फ वार याद रहता है, पेड़ को अपनी पूरी उम्र याद रहती है। Admin / Sep 24, 2026 कुल्हाड़ी को सिर्फ वार याद रहता है, पेड़ को अपनी पूरी उम्र याद रहती है। कुल्हाड़ी को सिर्फ वार याद रहता है, पेड़ को अपनी पूरी उम्र याद रहती है। Kulhadi ko sirf vaar yaad rehta hai, ped ko apni puri umar yaad rehti hai. Shayari International Day of Forests Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026