तुम्हारी हर परेशानी को अपनी मानकर, खुद को खो बैठी, अब खुद को ढूंढ रही हूँ, टुकड़ों में, धीरे धीरे।

तुम्हारी हर परेशानी को अपनी मानकर, खुद को खो बैठी, अब खुद को ढूंढ रही हूँ, टुकड़ों में, धीरे धीरे।

तुम्हारी हर परेशानी को अपनी मानकर, खुद को खो बैठी,
अब खुद को ढूंढ रही हूँ, टुकड़ों में, धीरे धीरे।


Tumhari har pareshani ko apni maankar, khud ko kho baithi,
ab khud ko dhoondh rahi hoon, tukdon mein, dheere dheere.