खड़खड़ाहट के बीच जब आवाज़ आई साफ Admin / Sep 24, 2026 खड़खड़ाहट के बीच जब आवाज़ आई साफ खड़खड़ाहट के बीच जब आवाज़ आई साफ, लगा जैसे मिल गया कोई पुराना दोस्त फिर से आज। Kharkharahat ke beech jab awaaz aayi saaf, laga jaise mil gaya koi purana dost phir se aaj. Shayari World Radio Day Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026