करघा धीरे गाता है, सब्र भरा गीत, धूप को बुनता है कपड़े में, यही उसकी जीत। Admin / Sep 24, 2026 करघा धीरे गाता है, सब्र भरा गीत, धूप को बुनता है कपड़े में, यही उसकी जीत। करघा धीरे गाता है, सब्र भरा गीत, धूप को बुनता है कपड़े में, यही उसकी जीत। Kargha dheere gaata hai, sabr bhara geet, Dhoop ko bunta hai kapde mein, yehi uski jeet. Shayari National Handloom Day Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026