हाथों में दस्ताने, आँखों में चश्मा हो, हर मजदूर का सपना, बस सही सलामत घर पहुँचना हो। Admin / Sep 24, 2026 हाथों में दस्ताने, आँखों में चश्मा हो, हर मजदूर का सपना, बस सही सलामत घर पहुँचना हो। हाथों में दस्ताने, आँखों में चश्मा हो, हर मजदूर का सपना, बस सही सलामत घर पहुँचना हो। Haathon mein dastaane, aankhon mein chashma ho, Har mazdoor ka sapna, bas sahi salamat ghar pahunchna ho. Shayari National Safety Day Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026