गुस्सा रखा दरवाज़े पर, अंदर मुस्कान लाए, बच्चे के सामने हम, फिर से माँ-बाप कहलाए। Admin / Sep 24, 2026 गुस्सा रखा दरवाज़े पर, अंदर मुस्कान लाए, बच्चे के सामने हम, फिर से माँ-बाप कहलाए। गुस्सा रखा दरवाज़े पर, अंदर मुस्कान लाए, बच्चे के सामने हम, फिर से माँ-बाप कहलाए। Shayari Coparenting Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026