गिनती हम सिर पर करते हैं, ज़रूरतों को भूल जाते हैं, यहीं से असली असंतुलन के बीज बो जाते हैं। Admin / Sep 24, 2026 गिनती हम सिर पर करते हैं, ज़रूरतों को भूल जाते हैं, यहीं से असली असंतुलन के बीज बो जाते हैं। गिनती हम सिर पर करते हैं, ज़रूरतों को भूल जाते हैं, यहीं से असली असंतुलन के बीज बो जाते हैं। Ginti hum sar par karte hain, zarooraton ko bhool jate hain, yahin se asli asantulan ke beej bo jate hain. Shayari World Population Day Shayari