एक पेड़ गिरा और आवाज़ किसी ने नहीं सुनी, फिर भी आसमान थोड़ा और झुक गया चुपचाप सुनी सुनी। Admin / Sep 24, 2026 एक पेड़ गिरा और आवाज़ किसी ने नहीं सुनी, फिर भी आसमान थोड़ा और झुक गया चुपचाप सुनी सुनी। एक पेड़ गिरा और आवाज़ किसी ने नहीं सुनी, फिर भी आसमान थोड़ा और झुक गया चुपचाप सुनी सुनी। Ek ped gira aur awaaz kisi ne nahi suni, phir bhi aasman thoda aur jhuk gaya chupchap suni suni. Shayari International Day of Forests Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026