- Apne
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- Jun 20, 2023
Dushman Shayari - Dosti Bhi, Daraar Bhi
Rishton mein mazbooti, muqabile mein himmat - yehi hai dushman shayari ka josh.
जो अपनों का सहारा बनते हैं, वही मुक़ाबिल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाते हैं - दुश्मन शायरी इसी आत्मविश्वास और रिश्तों की मज़बूती को शब्द देती है। इसी अंदाज़ को Attitude शायरी में और गहराई से पढ़ें।
- Last Updated on Aug 11, 2026
एक बार हमें अपना कह के तो देखो
- Dost
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- Jan 06, 2022
मेरे जो दोस्त है उनके लिए मैं ताक़त हूँ,
और जो मेरे दुश्मन है उनके लिए, मैं बहुत बड़ा आफत हूँ।।
- Jaan
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- Dec 14, 2021
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
- Man
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- Dec 09, 2021
तारे भी चमकते हैं, बादल भी बरसते हैं,
तू क्या.?? हमारे दुश्मन भी पैर पकड़ने को तरसते हैं।
- Attitude
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- Oct 23, 2021
अभी आँखों की शमाएं जल रही हैं प्यार जिंदा है,
अभी मायूस मत होना अभी बीमार ज़िंदा है,
हजारों जख्म खाकर भी मैं दुश्मन के मुक़ाबिल हूँ,
खुदा का शुक्र अब तक दिल-ए-खुद्दार जिंदा है।
- Hindutva
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- Sep 29, 2021
सीने में भगत सिंह और माथे पर हिंदुस्तान रखते है,
दुश्मन के लिए बगल में हिंदुस्तान रखते है।
- Bura
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- Mar 19, 2021
मेरा दुश्मन भी तू और दोस्त भी तू,
मेरे लिए मुसिबत भी तू उसका हल भी तू,
कर दे मेरा जो हाल बुरा भाई तू मेरा पर है,
मेरे खुशीयों की दस्तक भी तू।
- Desh
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- Jan 13, 2021
जिस देश के जवान सीने पर गोली खाते हैं
उस देश के दुश्मन उसका बाल भी बांका नहीं कर पाते हैं॥
- Bhaarat
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- Jan 07, 2021
दुश्मन की गोलियों का हम करेंगे सामना,
जो बुरी नजर रखे भारत पर,
नामोनिशान है उसका मिटाना।
- Khush
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- Nov 29, 2020
मेरे शरीर से आती है वतन की मिट्टी की खुशबु,
दुश्मन को चाटता हूं धूल,
आसमान को भी भर लूं मुठ्ठी में,
मैं रेगिस्तान में भी खिला दूं फूल !!
- Mahaan
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- Nov 27, 2020
दुनिया करती जिसे सलाम,
वो है भारत का सैनिक महान
रणभूमि में दुश्मन को जो चटाए धूल,
वो है भारत का जवान !!
- Dhan
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- Nov 23, 2020
"गठबंधन"
कभी था दुश्मन सपेरा सांप का पर अब साथ देखा है,
मेढकों को भी सियासत में हमने एक साथ देखा है।
जिस पंजे को हमने देखा था कभी छूते हुए अम्बर,
उन्ही पंजो को वोट के खातिर गधों के साथ देखा है।।
- Bhool
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- Apr 06, 2019
देखो सब दुष्टों का झुंड, अब एक साथ है आया ।
स्वार्थ भूलकर सबने अपना दुश्मन एक बनाया ।
अभिमन्यु की भांति फिर से सबने मिलकर घेरा ;
पार करेगा चक्र अकेले पार्थ स्वयं है आया ।
- Kal
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- Mar 27, 2019
मिल गयी है सफलता तो नजरिये बदले हैं
जो थे कल तक दुश्मन आज करीबी निकले हैं,
ना ही बदला हूँ मैं ना ही मेरे अंदाज बदले हैं,
ये तो बस शुरुआत थी अभी तो पड़ाव अगले हैं।
- Ham
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- Mar 21, 2019
कभी था दुश्मन सपेरा सांप का पर अब साथ देखा है,
मेढकों को भी सियासत में हमने एक साथ देखा है।
जिस पंजे को हमने देखा था कभी छूते हुए अम्बर,
उन्ही पंजो को वोट के खातिर गधों के साथ देखा है।।