धागा धागे से मिलकर, घंटों में सजता है, बुनकर का हाथ तब, फूल सा खिलता है। Admin / Sep 24, 2026 धागा धागे से मिलकर, घंटों में सजता है, बुनकर का हाथ तब, फूल सा खिलता है। धागा धागे से मिलकर, घंटों में सजता है, बुनकर का हाथ तब, फूल सा खिलता है। Dhaaga dhaage se milkar, ghanton mein sajta hai, Bunkar ka haath tab, phool sa khilta hai. Shayari National Handloom Day Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026