जब भी प्यार लगा कम, मैंने और कस के थामा, अब सीख रही हूँ ठहरना, बिना डर, बिना घबराहट के। Admin / Sep 24, 2026 जब भी प्यार लगा कम, मैंने और कस के थामा, अब सीख रही हूँ ठहरना, बिना डर, बिना घबराहट के। जब भी प्यार लगा कम, मैंने और कस के थामा, अब सीख रही हूँ ठहरना, बिना डर, बिना घबराहट के। Jab bhi pyaar laga kam, maine aur kas ke thama, ab seekh rahi hoon thahrna, bina dar, bina ghabrahat ke. Shayari Attachment Style Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026