कभी बहुत पास, कभी बहुत दूर भागी, अब सीख रही हूँ बीच का रास्ता, जहाँ दिल सुकून से रहे।

कभी बहुत पास, कभी बहुत दूर भागी, अब सीख रही हूँ बीच का रास्ता, जहाँ दिल सुकून से रहे।

कभी बहुत पास, कभी बहुत दूर भागी,
अब सीख रही हूँ बीच का रास्ता, जहाँ दिल सुकून से रहे।


Kabhi bahut paas, kabhi bahut door bhaagi,
ab seekh rahi hoon beech ka raasta, jahaan dil sukoon se rahe.