बाज़ार चमकते हैं, हंसी गूंजती है ज़ोर से, चांद रात शहर को लपेट लेती है खुशी की चादर से। Admin / Sep 24, 2026 बाज़ार चमकते हैं, हंसी गूंजती है ज़ोर से, चांद रात शहर को लपेट लेती है खुशी की चादर से। बाज़ार चमकते हैं, हंसी गूंजती है ज़ोर से, चांद रात शहर को लपेट लेती है खुशी की चादर से। Bazaar chamakte hain, hansi goonjti hai zor se, Chand Raat shehar ko lapet leti hai khushi ki chadar se. Shayari Chand Raat Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026