- Hindi
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- Aug 15, 2021
Baras Shayari - Waqt Aur Barsaat Ka Sangam
Kabhi saal guzarta hai, kabhi baadal barasta hai - dono yahan milte hain.
कभी बरसों पुरानी जुदाई का ग़म याद आता है, कभी पहली बारिश की ख़ुशबू लौट आती है - baras shayari में वक़्त के गुज़रने और मौसम के बरसने दोनों का ज़िक्र मिलता है। बारिश से जुड़ी और बातों के लिए Barsaat शायरी भी पढ़ें।
- Last Updated on Aug 11, 2026
जब प्रकृति का कहर बरसता है,
- Funny
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- Apr 11, 2021
मीठी मीठी यादों को पलकों पे सजा लेना,
साथ गुज़रे लम्हों को दिल में बसा लेना,
मैं तो बरसों का प्यासा हूँ, 'फराज़',
बिजली आ जाये तो याद से मोटर चला देना।
- Laila
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- Mar 20, 2021
क्यों बरसों से जुदाई का गम
लैला और हीर सह रही हैं,
जरा अपना रुमाल तो देना
मेरी नाक बह रही है।
- Chup
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- Mar 07, 2021
हमारा अंदाज कुछ ऐसा है**
जब हम बोलते हैं
तो बरस जाते हैं
और जब चुप रहते हैं
तो लोग तरस जाते हैं…
- Barsaat
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- Jan 09, 2021
बारिश की बूंदों से दिल पे दस्तक होती थी
सब मौसम बरसात थे मेरे और दिसम्बर था !!
- Chand
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- Jan 03, 2021
पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था
महके हुए दिन-रात थे मेरे और दिसम्बर था !!
चाँदनी-रात थी सर्द हवा से खिड़की बजती थी
उन हाथों में हाथ थे मेरे और दिसम्बर था !!
- New Year
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- Dec 26, 2020
ऐ जाते बरस तुझ को सौंपा ख़ुदा को
मुबारक मुबारक नया साल सब को !!
~मोहम्मद असदुल्लाह
- Bahaar
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- Dec 24, 2020
हैं इस हवा में क्या क्या बरसात की बहारें
सब्ज़ों की लहलहाहट बाग़ात की बहारें !!
~नज़ीर अकबराबादी
- Farmer's Day
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- Dec 15, 2020
किसान खुश है, बारिश खूब हुई है अबकी बरस,
खेत सींच दी है पर मकान का छत तोड़ दी है,
- Chaah
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- Dec 14, 2020
इस नए साल में खुशियों की बरसाते हो
प्यार के दिन और मोहब्बत भरी राते हो
रंजिशे नफरते मिट जाए सदा के लिए
सभी के दिलो में सिर्फ ऐसी चाहतें हो
- Hindi
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- Dec 09, 2020
कल तक उड़ती थी जो मुंह तक,
आज पैरों से लिपट गई
चंद बूंदें क्या बरसी बरसात की,
धूल की फितरत ही बदल गई...
- Man
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- Dec 02, 2020
ख़तरे के निशान से ऊपर बह रहा है उम्र का पानी
वक़्त की बरसात है कि थमने का नाम नहीं ले रही !!
- Dua
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- Dec 01, 2020
नयी उम्मीदों से भरा यह नया साल मुबारक हो,
ख़ुशी की मस्तियों के यह चाल मुबारक हो।
तुम्हारे ख्वाब सभी इस बरस में पुरे हो
दुआएं दिल से तुम्हे, यह साल मुबारक हो।
- Ham
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- Dec 01, 2020
नये बरस की पहली घड़ी हैं,
उम्मीद की नाव किनारे आने लगी हैं,
मन से एक दुआ निकली हैं,
यह धरती जो हम को मिली हैं।
या रब अब तो रहमत का साया कर दे,
के ये धूप में बहोत जली हैं।
- Ham
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- Nov 18, 2020
जो आना चाहो हज़ारों रास्ते
न आना चाहो तो हज़ारों बहाने।
मिज़ाज-ऐ-बरहम , मुश्किल रास्ता
बरसती बारिश और ख़राब मौसम।।
- Ham
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- Apr 02, 2019