इस जिस्म ने हर तूफ़ान में मुझे थामा है, अब मैं इसे किसी और की नज़र से नहीं, अपनी नज़र से देखूँगी। Admin / Sep 24, 2026 इस जिस्म ने हर तूफ़ान में मुझे थामा है, अब मैं इसे किसी और की नज़र से नहीं, अपनी नज़र से देखूँगी। इस जिस्म ने हर तूफ़ान में मुझे थामा है, अब मैं इसे किसी और की नज़र से नहीं, अपनी नज़र से देखूँगी। Is jism ne har toofan mein mujhe thama hai, ab main ise kisi aur ki nazar se nahi, apni nazar se dekhungi. Shayari Body Positivity Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026