रुका था मैं हर उस पल में, जहाँ तुम्हारी आवाज़ आती थी, अब उस खामोशी में भी, अपनी हँसी सुनाई देती है।

रुका था मैं हर उस पल में, जहाँ तुम्हारी आवाज़ आती थी, अब उस खामोशी में भी, अपनी हँसी सुनाई देती है।

रुका था मैं हर उस पल में, जहाँ तुम्हारी आवाज़ आती थी,
अब उस खामोशी में भी, अपनी हँसी सुनाई देती है।


Ruka tha main har us pal mein, jahaan tumhari aawaaz aati thi,
ab us khamoshi mein bhi, apni hansi sunayi deti hai.