रुका था मैं हर उस पल में, जहाँ तुम्हारी आवाज़ आती थी, अब उस खामोशी में भी, अपनी हँसी सुनाई देती है। Admin / Sep 24, 2026 रुका था मैं हर उस पल में, जहाँ तुम्हारी आवाज़ आती थी, अब उस खामोशी में भी, अपनी हँसी सुनाई देती है। रुका था मैं हर उस पल में, जहाँ तुम्हारी आवाज़ आती थी, अब उस खामोशी में भी, अपनी हँसी सुनाई देती है। Ruka tha main har us pal mein, jahaan tumhari aawaaz aati thi, ab us khamoshi mein bhi, apni hansi sunayi deti hai. Shayari Ghosting Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026