हर एक इंसान हवा में उड़ता फिरता है साहब

हर एक इंसान हवा में उड़ता फिरता है साहब

हर एक इंसान हवा में उड़ता फिरता है साहब,
फिर भी न जाने जमीं पर इतनी भीड़ क्यों है


Har ek insaan hava mein udata phirata hai saahab,
Phir bhee na jaane jameen par itanee bheed kyon hai