शायरी पढ़ने तक ही ताल्लुक रखते है लोग

शायरी पढ़ने तक ही ताल्लुक रखते है लोग

शायरी पढ़ने तक ही ताल्लुक रखते है लोग

शायरी पढ़ने तक ही ताल्लुक रखते है लोग,
किसी ने अभी तक हमारी महबूबा का नाम तक नहीं पूछा।


Shaayaree padhane tak hee taalluk rakhate hai log,
Kisee ne abhee tak hamaaree mahabooba ka naam tak nahin poochha.