ये ज़रूरी नहीं हर शख़्स मसीहा ही हो

ये ज़रूरी नहीं हर शख़्स मसीहा ही हो

ये ज़रूरी नहीं हर शख़्स मसीहा ही हो,
प्यार के ज़ख़्म अमानत हैं दिखाया न करो।


Yeh Jaruri Nahi Har Shakhs Maseeha Hi Ho,
Pyaar Ke Zakhm Amaanat Hain Dikhaya Na Karo.