मुकम्मल हो ही गयी आखिर आज ज़िन्दगी की ग़ज़ल

मुकम्मल हो ही गयी आखिर आज ज़िन्दगी की ग़ज़ल

मुकम्मल हो ही गयी आखिर आज ज़िन्दगी की ग़ज़ल

मुकम्मल हो ही गयी आखिर, आज ज़िन्दगी की ग़ज़ल...
मेरे महबूब ने भी उसको पढ़कर, वाह-वाह बोला है..


Mukammal ho hee gayee aakhir, aaj zindagee kee gazal...
Mere mahaboob ne bhee usako padhakar, vaah-vaah bola hai..