बुलबुलो गुल पै जो गुजरी हमको उससे क्या गरज Rajnish / Aug 11, 2026 बुलबुलो गुल पै जो गुजरी हमको उससे क्या गरज बुलबुलो-गुल पै जो गुजरी हमको उससे क्या गरज हम तो गुलशन में फकत रंगे – चमन देखा किए Bulabulo-gul pai jo gujaree hamako usase kya garaj Ham to gulashan mein phakat range – chaman dekha kie Shayari Ham Shayari Love Shayari Man Shayari Rang Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026