बंधन सा इक बँधा था रग ओ पय से जिस्म में Rajnish / Aug 11, 2026 बंधन सा इक बँधा था रग ओ पय से जिस्म में बंधन सा इक बँधा था रग-ओ-पय से जिस्म में मरने के ब'अद हाथ से मोती बिखर गए Bandhan sa ik bandha tha rag-o-pay se jism mein Marane ke baad haath se motee bikhar gae Shayari Dhan Shayari Haath Shayari Mar Shayari Raksha Bandhan Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026