न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की

न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की

न जाने कैसी "नज़र" लगी है "ज़माने" की... . .
कमब्खत "वजह" ही नही मिलती "मुस्कुराने" की...


Na jaane kaisee "nazar" lagee hai "zamaane" kee... . .
Kamabkhat "vajah" hee nahee milatee "muskuraane" kee...