दिल के रिश्तों की नज़ाकत को वो क्या जाने

दिल के रिश्तों की नज़ाकत को वो क्या जाने

दिल के रिश्तों की नज़ाकत को वो क्या जाने,
नरम लफ़्ज़ों से भी लग जाती हैं चोटें अक्सर।


Dil Ke Rishton Ki Nazakat Ko Woh Kya Jaane,
Naram Lafzon Se Bhi Lag Jati Hai Chotein Aksar.