तुम्हें ग़ैरों से कब फुर्सत

तुम्हें ग़ैरों से कब फुर्सत

तुम्हें ग़ैरों से कब फुर्सत
हम अपने ग़म से कब ख़ाली,
चलो बस हो चुका मिलना
न तुम ख़ाली न हम ख़ाली।


Tumhe Ghairon Se Kab Fursat
Hum Apne Gham Se Kab Khaali,
Chalo Bas Ho Chuka Milna
Na Tum Khaali Na Hum Khaali.