झंडे गिरे मिल रहें हैं सड़क किनारे साहब

झंडे गिरे मिल रहें हैं सड़क किनारे साहब

झंडे गिरे मिल रहें हैं सड़क किनारे साहब
आज़ादी भी अब बूढ़ी माँ सी हो गई,
70 के बाद सँभाली नहीं जाती बच्चों से


Jhande gire mil rahen hain sadak kinaare saahab
Aazaadee bhee ab boodhee maan see ho gaee,
70 ke baad sanbhaalee nahin jaatee bachchon se