खुद को औरों की तवज्जो का तमाशा न करो

खुद को औरों की तवज्जो का तमाशा न करो

खुद को औरों की तवज्जो का तमाशा न करो,
आइना देख लो अहबाब से पूछा न करो,
शेर अच्छे भी कहो सच भी कहो कम भी कहो,
दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुसवा न करो।


Khud Ko Auron Ki Tabajjo Ka Tamasha Na Karo,
Aayina Dekh Lo Ahbaab Se Puchha Na Karo,
Sher Achhe Bhi Kaho Sach Bhi Kaho Kam Bhi Kaho,
Dard Ki Daulat-e-Nayab Ko Ruswa Na Karo.