कल तक बेइंतिहा मोहब्बत और आज यूँ बेरुखी

कल तक बेइंतिहा मोहब्बत और आज यूँ बेरुखी

कल तक बेइंतिहा मोहब्बत और आज यूँ बेरुखी
कमबख्त उसने भी हमे हज़ार का नोट समझ रखा है ।


Kal tak beintiha mohabbat aur aaj yoon berukhee
Kamabakht usane bhee hame hazaar ka not samajh rakha hai .