उसको हर चंद अंधेरों ने निगलना चाहा

उसको हर चंद अंधेरों ने निगलना चाहा

उसको हर चंद अंधेरों ने निगलना चाहा,
बुझ न पाया वो मोहब्बत का दिया है शायद।


Usko Har Chand Andheron Ne Nigalna Chaha,
Bujh Na Paaya Wo Mohabbat Ka Diya Hai Shayad.