इसी ख्याल से गुज़री है शाम-ए-ग़म अक्सर Admin / Jul 22, 2021 इसी ख्याल से गुज़री है शाम-ए-ग़म अक्सर इसी ख्याल से गुज़री है शाम-ए-ग़म अक्सर, कि दर्द हद से जो गुज़रेगा तो मुस्कुरा दूंगा। Isi Khayal Se Gujri Hai Shaam-e-Gham Aksar, Ki Dard Had Se Jo Gujrega To Muskura Dunga. Shayari Dard-bhari Shayari