इश्क का होना भी लाजमी है शायरी के लिये

इश्क का होना भी लाजमी है शायरी के लिये

इश्क का होना भी लाजमी है शायरी के लिये..
कलम लिखती तो दफ्तर का बाबू भी ग़ालिब होता।


Ishk ka hona bhee laajamee hai shaayaree ke liye..
Kalam likhatee to daphtar ka baaboo bhee gaalib hota.